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अमेरिका में ट्रंप प्रशासन की कड़ी वीजा नीति का असर: भारतीय और चीनी छात्रों व पेशेवरों पर बड़ा झटका

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अमेरिका में ट्रंप प्रशासन द्वारा लागू की गई सख्त वीजा और आव्रजन नीतियों का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। छात्रों और पेशेवरों के लिए जारी होने वाले वीजा में भारी कमी दर्ज की गई है, जिसमें भारतीय और चीनी नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। जनवरी से अगस्त 2025 तक जारी आंकड़े बताते हैं कि इन देशों के नागरिकों को 2024 की इसी अवधि की तुलना में करीब 25 लाख कम वीजा मिले।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय द्वारा मार्च 2025 की शुरुआत में जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से अगस्त 2025 तक स्थायी और अस्थायी वीजा की स्वीकृति 11 प्रतिशत कम हुई। इन वीजा में मुख्य रूप से छात्र व कार्य वीजा शामिल हैं, जबकि पर्यटक वीजा को इस आंकड़े में शामिल नहीं किया गया है। विश्लेषकों के अनुसार, यह गिरावट इस बात का संकेत है कि अमेरिकी सरकार ने अपने आव्रजन नियमों को कड़ा कर दिया है और विदेशी नागरिकों के प्रवेश को नियंत्रित करने के लिए नई प्रक्रियाएं लागू की हैं।
विशेष रूप से भारत और चीन के छात्रों और पेशेवरों को सबसे अधिक असर पड़ा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि इन देशों के लिए जारी किए गए वीजा की संख्या में 84,000 से अधिक की कमी आई। इस कमी का सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय छात्रों और श्रमिकों की संख्या में गिरावट को माना जा रहा है।
जनवरी से अगस्त 2024 के बीच अमेरिका ने 3.44 लाख से अधिक छात्र वीजा जारी किए थे, जबकि 2025 में यह संख्या घटकर 2.38 लाख के आसपास रह गई। यह लगभग 1 लाख वीजा की कमी दर्शाता है, जो छात्र प्रवास पर सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। इसके साथ ही, पारिवारिक प्राथमिकता वाले वीजा, जिनमें अमेरिकी नागरिकों के वयस्क बच्चे और भाई-बहन शामिल हैं, में 27 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह लगभग 44,000 वीजा की कमी के बराबर है।
सिर्फ छात्रों तक ही असर नहीं है। समुद्री और हवाई सेवा कर्मियों के लिए जारी वीजा में 30,876 की कमी आई है। इसके अलावा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और प्रशिक्षण के लिए आने वाले व्यक्तियों के वीजा में भी 29,594 की गिरावट हुई है। मंगेतर या जीवनसाथी के लिए जारी वीजा में भी बड़ी कमी देखी गई, जो 37,229 से घटकर 18,894 रह गई। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि ट्रंप प्रशासन की नई नीतियों ने विभिन्न श्रेणियों में वीजा स्वीकृति को काफी सीमित कर दिया है।
इस बीच, अमेरिका ने H-1B वीजा प्रक्रिया में भी बड़े बदलाव किए हैं। पहले H-1B वीजा आवेदकों का चयन रैंडम लॉटरी प्रणाली के आधार पर होता था। अब अमेरिका ने इसे वेतन आधारित प्रणाली में बदल दिया है। 1 अप्रैल 2026 से यह नया सिस्टम अनिवार्य हो जाएगा। इस नए सिस्टम के तहत कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों के लिए याचिकाएं दाखिल करते समय नौकरी और वेतन से जुड़ी सभी जानकारी प्रदान करनी होगी। इसका मकसद उच्च अनुभव और उच्च वेतन पाने वाले पेशेवरों को प्राथमिकता देना है।
H-1B वीजा प्रक्रिया के नए सिस्टम में आवेदकों को चार वेतन स्तरों में वर्गीकृत किया गया है। उच्च वेतन वाले पदों के लिए आवेदन करने वाले लोगों को चयन प्रक्रिया में अधिक मौके मिलेंगे। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि अमेरिकी कंपनियों में योग्य और अनुभवी पेशेवरों को वीजा मिलने की संभावनाएं बढ़ेंगी, जबकि कम वेतन वाले श्रमिकों के लिए अवसर सीमित हो जाएंगे।
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने इस नीति की पुष्टि करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप को अमेरिकी नागरिकों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का जनादेश मिला था। उनके द्वारा लिए गए हर नीतिगत निर्णय में यह प्राथमिकता दिखाई देती है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने कहा कि वीजा कोई अधिकार नहीं, बल्कि विशेषाधिकार है। उनका कहना है कि ट्रंप प्रशासन अमेरिकी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए विदेशी नागरिकों के बड़े पैमाने पर प्रवेश को नियंत्रित करने के लिए कठोर नियम लागू कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीति का उद्देश्य न केवल अमेरिकी नागरिकों को रोजगार और शिक्षा के अवसरों में प्राथमिकता देना है, बल्कि अवैध प्रवास और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को भी नियंत्रित करना है। छात्रों और पेशेवरों की संख्या में कमी, विशेष रूप से भारतीय और चीनी नागरिकों में, इसी दिशा में उठाया गया एक कदम है।
इस नीति के प्रभाव से अमेरिका में उच्च शिक्षा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं की संख्या पर असर पड़ सकता है। भारतीय और चीनी छात्र अमेरिका के विश्वविद्यालयों में अध्ययन और शोध गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। H-1B वीजा में बदलाव से अमेरिका में तकनीकी और पेशेवर श्रमिकों की उपलब्धता में कमी आ सकती है।
वहीं, भारतीय और चीनी पेशेवरों के लिए यह चुनौती पेश करती है कि उन्हें अमेरिका में रोजगार और स्थायी निवास पाने के लिए उच्च वेतन और अनुभव पर ध्यान देना होगा। अमेरिकी कंपनियों को भी अब अपने विदेशी कर्मचारियों की भर्ती रणनीति बदलनी पड़ सकती है, ताकि वे नई वेतन आधारित चयन प्रणाली के तहत योग्य उम्मीदवारों को चुन सकें।
अमेरिका में यह नीति छात्रों, पेशेवरों और पारिवारिक श्रेणियों के लिए जारी वीजा की संख्या में कमी का स्पष्ट संकेत देती है। ट्रंप प्रशासन की यह कठोर नीति अमेरिकी नागरिकों को रोजगार और शिक्षा में प्राथमिकता देने के साथ-साथ सुरक्षा और कानूनी प्रवास को सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।
इस नीति का वैश्विक असर भी नजर आ रहा है। भारतीय और चीनी छात्रों और पेशेवरों के लिए अमेरिका में अध्ययन और काम करने के अवसर सीमित हो गए हैं। इसके परिणामस्वरूप कई लोग अन्य देशों की ओर रुख कर सकते हैं, जो उन्हें उच्च शिक्षा और पेशेवर अनुभव के विकल्प प्रदान करते हैं।
कुल मिलाकर ट्रंप प्रशासन की वीजा नीति ने अमेरिका में विदेशी छात्रों और पेशेवरों के लिए हालात को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। नई नीतियों के तहत वीजा प्राप्त करना अब अधिक कठिन हो गया है और इसके लिए उच्च वेतन, अनुभव और योग्य दस्तावेजों की आवश्यकता होगी। इस कदम से अमेरिका में श्रम और शिक्षा क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं की संख्या पर स्पष्ट असर पड़ेगा।

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